आदाब, मेरा नाम डॉ. सय्यद नासिर शाह है। मैं खुद को सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि एक विचारक और आलोचक के रूप में देखता हूँ। मेरी हमेशा ये कोशिश रहती है कि अपने विचारों और आलोचनाओं के ज़रिये उन मुद्दों पर बात करूँ जो सच में मायने रखते हैं, और पढ़ने वालों को एक नया नज़रिया दे सकूँ।
Qalamse पर मैं आपका दिल से इस्तक़बाल करता हूँ। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि जब ख़यालात को लफ़्ज़ों का रूप मिलता है, तो वो एक नए और खूबसूरत सफ़र की शुरुआत करते हैं। ज़िंदगी के तजुर्बात, समाज के रंग, और ज़ेहन में आने वाले छोटे-बड़े ख़यालात को जब मैं क़लम के ज़रिये कागज़ पर उतारता था, तो हमेशा यह ख़्वाहिश होती थी कि इन्हें और लोगों तक पहुँचाया जाए। यह वेबसाइट उसी ख़्वाहिश की एक डिजिटल शक्ल है।
यह वेबसाइट सिर्फ एक ब्लॉग नहीं, बल्कि मेरे अपने मज़मून (Articles) और ख़यालात का एक खुला आईना है। यहाँ मैं अपने लिखे हुए वो तमाम मज़मून आपके साथ साझा करता हूँ, जो सीधे दिल से निकल कर मेरी क़लम के रस्ते इन डिजिटल पन्नों तक पहुँचे हैं।
मेरा मक़सद सिर्फ लफ़्ज़ लिखना नहीं, बल्कि उन लफ़्ज़ों के ज़रिये आपके दिल तक पहुँचना और एक बेहतर सोच को बढ़ावा देना है। मैं उम्मीद करता हूँ कि मेरी क़लम से निकली हर तहरीर आपको कुछ नया सोचने पर मजबूर करेगी, या आपसे एक गहरा रिश्ता बनाएगी।